इतिहास कुछ नहीं है, संघर्ष की कहानी
गाँधी, शिवा, भगत सिंह और झाँसी वाली रानी
कोई भी कायरो का इतिहास क्यों पढ़ेगा।
संग्राम ......................................
आओ लड़ें स्वयं के कलुषों से कल्मषों से,
भोगों से वासना से रोगो के राक्षसों से,
कुंदन वाही बनेगा जो आग में तपेगा।
संग्राम ......................................
घेरा समाज को है, कुंठा कुरीतियों ने,
व्यसनों ने रुढियो ने निर्मम अनीतियो ने,
इनकी चुनौतियों से, है कौन जो लडेगा।
संग्राम ......................................
चिंतन चरित्र में अब विकृति बढ़ी हुई है,
चाहूँ ओर कौरवो की सेना खाड़ी हुई है।
क्या पार्थ इन छड़ों भी व्योमोह में फंसेगा। ,
संग्राम ......................................

मशालें ले कर चलना कि जब तक रात वांकी है,
सभल कर हर कदम रखना कि जब तक रात वांकी है,
मशालें ले ...........................................
मिले मंसूर को सूली, जहर सुकरात के हिस्से,
रहेगा जुर्म सच कहना, कि जब तक रात वांकी है,
मशालें ले ...........................................
पसीने की तो तुम छोड़ो, लहू मजदुर का यारों,
कि सस्ता पानी सा बहेगा, कि जब तक रात वांकी है,
मशालें ले ...........................................
तेर मस्तक पे होगा हर पल विद्रोह का निशा,
नहीं ये जोश कम होगा, कि जब तक रात वांकी है,
मशालें ले ...........................................
अंधेरों की अदालत में, है क्या फरियाद का फायदा,
तू कर संग्राम ये साथी, कि जब तक रात वांकी है,
मशालें ले ...........................................

Tuesday, October 30, 2012

शहीद वेयंत सिंह अमर रहें।


आज सत्याग्रह  आन्दोलन और अनसन असहय हो गये हैं।  देश की जनता त्रस्त है,  सत्ता मस्त है और न्यायालय  भ्रष्ट है। ऐसे में याद आती है वेयंत सिंह जैसे अमर शहीदों की, आज वह ही देश को  गर्त में जाने से बचा सकते हैं।  धन के लोभी सत्ताधीश देश को वेचे जा रहे हैं और आन्दोलनकारी सत्याग्राही  और अनसनकारियो  पर लाठी भांजी  जा रही  है।  पुलिस और सेना निहत्थी जनता पर लाठी भजें इससे तो अच्छा है कोई देशभक्त रक्षक सिपाही  ऐसे देश द्रोहियों को गोली मार  दे। ऐसा एक देश भक्त हजारो की संख्या के एक आन्दोलन से भरी होगा।  मैं ऐसे देश भक्त को नमन करता हूँ।

अगर देश भक्त हो तो लाइक  करें।  नहीं तो टिपण्णी करे। .................................

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे 09335122064.

Adarniye Dwivedi Ji


Parmatma ko Vina jane gyat kahna thik nahi. Aisa kaha jata hai Jo parmatma ko jan leta hai bo bandhno se mukt ho jata hai. uske Jivan me sadachar aajata hai. Vah trashna aur Lobh se Mukt ho jata ha, kam krodh aur vashnaye use nahi stati. Aadrarniye kya apne jan liya hai us agyat ko? ya aisa koi vyakti aap ka nikat parichit hai? Yah ek adarsh kalpna hai. Vah agyat tha, vah agyat hai, vah agyat hi rahega, Isi me uski sampurnta hai. Jin sanatan vachno ki apne charcha ki hai, vah log uchch koti ke samajshastri aur manochikitsak rahe hoge. Unka samaj par bahut bada rin hai, ham sabhi ko unka rini hona chahiye.

लेखक के प्रयास की सराहना करता हूँ।

दिवेदी जी

आप द्वारा दिए गए लिंक का अध्यायन किया ( http://adaniel.tripod.com/aryans.htm)


According to this division, nearly 72% of Indians are Aryans and 28% are Dravidians

विचार कीजिये सभी OBC, SC, ST मिलाकर 72% होगा। वाकी बचे सवर्ण , 


क्या सभी सवर्ण द्रविण है?  मुस्लिम  धर्म और अन्य धर्म कहाँ जायेगें ?


उक्त लेखा को वैज्ञानिकता की कसौटी  पर नहीं रखा जा सकता , इसलिए मै  इस लेख  से पूरी तरह असहमत हूँ।  


लेखक धन्वाद का पत्र है, उसने अपने रसायन शास्त्र से जाति व्यवस्था को नष्ट करने का प्रयाश किया है। 

मै उसके इस प्रयास की सराहना करता हूँ। 

Samaj Physics nahi chemistry Hai

Samaj Physics nahi chemistry Hai, N jane kitni jatiya vilupt hogai. Mitane balone aise mitaya ki Nam hi mit gaya toa aaj kaun batayega sach kya aur Jhuth kya, Ranaprtap ka khandan kaha gaya, Laxmi Bai ke vansaj kaha hai, chandra shekhar kaha gaye, ........................... lekin physics padhne baloki samjh me nahi ayega. Ugr Rashtrvad Desh ke liye utna hi bada khatra hai, Jitna Aatankvad ?

प्रिय द्विवेदी जी


रावण वर्ण संकर था, वर्ण संकर कभी आर्य नहीं कहलाये, वह कर्म से व्राह्मण था, इसे कभी हिन्दू समाज ने स्वीकार नहीं किया। डा0 भीम राव आंबेडकर इसका ताजा उधारण है। डा0 आंबेडकर को कभी आर्य नहीं समझा गया।

कृपया आग्रह छोड़ दें और अपने ज्ञान का विकास करें। 

लगता अपने दो वेद नहीं पढ़े है, केवल नाम के द्विवेदी है।

Aise Aatatayi Shasan me koi Itihas nahi likh sakta. Isliye Valmiki ek rajkavi the isiliye Jinda rah sake. Kya Ap jante Hai Kurur shask Ram ne Shambuk Rishi ka vadh kiya tha ?

Friday, October 26, 2012

प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद-1

प्रिय बंधुओ आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद,  सचाई से मुह न मोड़ो।

धर्म की आड़ में, या किसी आतातायी  के आतंक के भय से अन्याय को न्याय नहीं कहा जा सकता  है, राम एक आतातायी शासक था, गद्दी पर बैठने के 8 वर्ष के अंदर ही उसने अस्वमेघ यज्य किया था इस से यह सिद्ध होता है  वह जनप्रिय शासक नहीं था, उसकी सेना ने दो बच्चो से युद्ध किया था विना यह जाने की वह किसके वच्चे है। इससे यह सिद्ध होता है कि वह कितना खूखार शासक था। अगर यह उसके स्वमं  के वच्चे न  होते तो  उनका नाम भी इतिहास से मिटा दिया गया होता। बाल्मीकि एक राज कवि थे और उन्होंने केवल राजा की महिमा का वखन किया है। राम रावण का युद्ध आर्यो और अनार्यो के बीच का अंतिम युद्ध था। राम को महिमावान वतने के लिए रामायण में वार-वार सुधार किये गये। तुलसी ने रामचरित्र मानस में वाही कार्य किया है। 

हमें यह नहीं भूलना चाहिए तुलसी के राम और कवीर के राम में वहुत बड़ा अंतर है। तुलसी के राम अयोध्या के राजा राम हैं जवकि कवीर के राम वह अज्ञात परम पिता परमेश्वर है। 

इसलिए परम पिता परमेश्वर और आतातइयो के वीच अंतर करना सीखे!

स्त्री की नाक काटना धर्म है?

 स्त्री की नाक काटना धर्म है। बधायी किस बात की ? आताताई के  विजयी होने की, सूपनखा यदि रावन की वहन न होती तो किसी को भी इस स्त्री दुराचार का पता तक न चलता।

इसीलिए जाति प्रथा समाप्त नहीं हो सकी और सैकड़ो बरस देश गुलाम रहा, शूद्र  रावन के वंसज है और यह कभी हिन्दू धर्म के अंग नहीं रहे, और न समझे गए। नाक तो आज भी हरियाणा में कटी जा रही है। देश को वास्तब में विश्व गुरु बनाना है तो दशहरा मनाना बंद करना पड़ेगा। यह शूद्रो के अपमान का प्रतिक है अन्यथा यह गृह युद्ध बंद नहीं होगा (शीत युद्ध) और हर डा0 आंबेडकर अंग्रेजो का समर्थक होगा। सोच लो  800 साल की गुलामी की है और आगे कितनी करनी है? FDI से वास्तविक हानि किसकी है, सेवक तो हमेसा सेवक ही रहेगा क्या फर्क पड़ता है मालिक कौन है ? हमने गोरे अंग्रेज भी देखे और काले अंग्रेज भी देखे, हम तब भी लूटे जा रहे थे और हम आज भी लूटे जा रहे है, जड़, जमींन,  जंगल सब कुछ तो लूट लिया रोजगार का कोई साधन तो नहीं छोड़ा हमारे पास हमें तो दूसरे की नौकरी ही करनी है। तो क्या फर्क पड़ता है मालिक देशी है या विदेशी हजारो बर्षो से हमारे जख्मो पर नामक छिड़कने बाले हमारे कभी नहीं हो सकते है।