इतिहास कुछ नहीं है, संघर्ष की कहानी
गाँधी, शिवा, भगत सिंह और झाँसी वाली रानी
कोई भी कायरो का इतिहास क्यों पढ़ेगा।
संग्राम ......................................
आओ लड़ें स्वयं के कलुषों से कल्मषों से,
भोगों से वासना से रोगो के राक्षसों से,
कुंदन वाही बनेगा जो आग में तपेगा।
संग्राम ......................................
घेरा समाज को है, कुंठा कुरीतियों ने,
व्यसनों ने रुढियो ने निर्मम अनीतियो ने,
इनकी चुनौतियों से, है कौन जो लडेगा।
संग्राम ......................................
चिंतन चरित्र में अब विकृति बढ़ी हुई है,
चाहूँ ओर कौरवो की सेना खाड़ी हुई है।
क्या पार्थ इन छड़ों भी व्योमोह में फंसेगा। ,
संग्राम ......................................

मशालें ले कर चलना कि जब तक रात वांकी है,
सभल कर हर कदम रखना कि जब तक रात वांकी है,
मशालें ले ...........................................
मिले मंसूर को सूली, जहर सुकरात के हिस्से,
रहेगा जुर्म सच कहना, कि जब तक रात वांकी है,
मशालें ले ...........................................
पसीने की तो तुम छोड़ो, लहू मजदुर का यारों,
कि सस्ता पानी सा बहेगा, कि जब तक रात वांकी है,
मशालें ले ...........................................
तेर मस्तक पे होगा हर पल विद्रोह का निशा,
नहीं ये जोश कम होगा, कि जब तक रात वांकी है,
मशालें ले ...........................................
अंधेरों की अदालत में, है क्या फरियाद का फायदा,
तू कर संग्राम ये साथी, कि जब तक रात वांकी है,
मशालें ले ...........................................

Friday, October 26, 2012

प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद-1

प्रिय बंधुओ आपकी प्रतिक्रिया के लिए धन्यवाद,  सचाई से मुह न मोड़ो।

धर्म की आड़ में, या किसी आतातायी  के आतंक के भय से अन्याय को न्याय नहीं कहा जा सकता  है, राम एक आतातायी शासक था, गद्दी पर बैठने के 8 वर्ष के अंदर ही उसने अस्वमेघ यज्य किया था इस से यह सिद्ध होता है  वह जनप्रिय शासक नहीं था, उसकी सेना ने दो बच्चो से युद्ध किया था विना यह जाने की वह किसके वच्चे है। इससे यह सिद्ध होता है कि वह कितना खूखार शासक था। अगर यह उसके स्वमं  के वच्चे न  होते तो  उनका नाम भी इतिहास से मिटा दिया गया होता। बाल्मीकि एक राज कवि थे और उन्होंने केवल राजा की महिमा का वखन किया है। राम रावण का युद्ध आर्यो और अनार्यो के बीच का अंतिम युद्ध था। राम को महिमावान वतने के लिए रामायण में वार-वार सुधार किये गये। तुलसी ने रामचरित्र मानस में वाही कार्य किया है। 

हमें यह नहीं भूलना चाहिए तुलसी के राम और कवीर के राम में वहुत बड़ा अंतर है। तुलसी के राम अयोध्या के राजा राम हैं जवकि कवीर के राम वह अज्ञात परम पिता परमेश्वर है। 

इसलिए परम पिता परमेश्वर और आतातइयो के वीच अंतर करना सीखे!

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