आदरणीय डा0 रेवा नंदन द्विवेदी जी उर्फ़ मामा जी,
छी-छी.....क्या लिखा अपने .......................? .(Reva Nandan Dwivedi Sale ji mujhey Aapse kuchh isi tarah ke ans ki ummid thi mai agyaniyo se age sawal nahi puchunga)
कह दो कि हम ब्राह्मण कुल में पैदा होने के वाद भी तुम्हारे एक प्रश्न का भी उत्तर देने में सक्षम नहीं हैं, तो अज्ञानी आप हो या हम ?
मेरे सामने पाखंड नहीं चल सकता द्विवेदी जी इसलिए पाखंड से आपको बहार निकालना जरुरी है। किसी को कुछ दो तो उसका पात्र खली होना चाहिए आप घमंड से इतना अधिक भरे हुए हो की मेरे उत्तर को सभालने की सामर्थ नहीं है आपमें, इसलिए पहले अपना पात्र खली करके आओ, आपके छः प्रश्नों का उत्तर मैं आने ब्लॉग अनर्यो की खोज में शीघ्र ही दूगाँ पर वो आपके लिए नहीं होगें क्योकि भरे हुए पात्र में कुछ भी डालने की मैं मुर्खता नहीं करता।
आपके इस उत्तर से एक बात स्पष्ट हो गयी कि ब्राह्मण होने के बाद भी आपको रिस्तो का बोध नहीं है, हिन्दू में होने वाले दो प्रकार के विवाह "अनुलोम विवाह" और "प्रतिलोम विवाह" और उनसे उत्पन संताने ही जड़ वर्ण व्यवस्था का आधार है हिन्दू व्यवस्था के जानकार अपने खानदानियो से पूछ लेना की आप मेरे मामा हो की नहीं? क्योकि जब मैं समझाऊंगा तो आपके पैर से जमीन खिसक जाएगी आप के दिमाग में जो फितूर भरा हुआ है जब तक वो नहीं निकल जाता कोई भी उत्तर देना वेकार है इसीलिए मैं पहले ही कह चूका हूँ वात वहुत छोटी सी है पर समझना वहुत कठिन है { .......आपके इन सरल से प्रश्नों का उत्तर भी बहुत सरल है, किन्तु इसे समझना बहुत कठिन है। ......... क्या सभी अनार्यो को आतातायी शासक राम ने मर डाला था ? शेष अनार्य (द्रविण /राक्षस) कहा गये ? }
जो
मित्र मुझसे असहमत हैं k.mittra@rediffmail.com पर ई-मेल कर सकते हैं अथवा
09335122064 पर संपर्क करें। ब्लोग्स में टिपण्णी कर सकते "अनार्यो की
खोज "(http://anaryokikhoj.blogspot.in/2012/11/0-1.html ) "आगे की यात्रा" (http://aagekiyatra.blogspot.in) आचार्य रजनीश एक नवीन विचारधारा (http://aacharyrajneesh.blogspot.in/2012/11/blog-post_12.html) हैं।छी-छी.....क्या लिखा अपने .......................? .(Reva Nandan Dwivedi Sale ji mujhey Aapse kuchh isi tarah ke ans ki ummid thi mai agyaniyo se age sawal nahi puchunga)
कह दो कि हम ब्राह्मण कुल में पैदा होने के वाद भी तुम्हारे एक प्रश्न का भी उत्तर देने में सक्षम नहीं हैं, तो अज्ञानी आप हो या हम ?
मेरे सामने पाखंड नहीं चल सकता द्विवेदी जी इसलिए पाखंड से आपको बहार निकालना जरुरी है। किसी को कुछ दो तो उसका पात्र खली होना चाहिए आप घमंड से इतना अधिक भरे हुए हो की मेरे उत्तर को सभालने की सामर्थ नहीं है आपमें, इसलिए पहले अपना पात्र खली करके आओ, आपके छः प्रश्नों का उत्तर मैं आने ब्लॉग अनर्यो की खोज में शीघ्र ही दूगाँ पर वो आपके लिए नहीं होगें क्योकि भरे हुए पात्र में कुछ भी डालने की मैं मुर्खता नहीं करता।
आपके इस उत्तर से एक बात स्पष्ट हो गयी कि ब्राह्मण होने के बाद भी आपको रिस्तो का बोध नहीं है, हिन्दू में होने वाले दो प्रकार के विवाह "अनुलोम विवाह" और "प्रतिलोम विवाह" और उनसे उत्पन संताने ही जड़ वर्ण व्यवस्था का आधार है हिन्दू व्यवस्था के जानकार अपने खानदानियो से पूछ लेना की आप मेरे मामा हो की नहीं? क्योकि जब मैं समझाऊंगा तो आपके पैर से जमीन खिसक जाएगी आप के दिमाग में जो फितूर भरा हुआ है जब तक वो नहीं निकल जाता कोई भी उत्तर देना वेकार है इसीलिए मैं पहले ही कह चूका हूँ वात वहुत छोटी सी है पर समझना वहुत कठिन है { .......आपके इन सरल से प्रश्नों का उत्तर भी बहुत सरल है, किन्तु इसे समझना बहुत कठिन है। ......... क्या सभी अनार्यो को आतातायी शासक राम ने मर डाला था ? शेष अनार्य (द्रविण /राक्षस) कहा गये ? }
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